महिलाओं ने भले ही जीवन के हर क्षेत्र में काफी प्रगति कर ली हो, लेकिन एक अध्ययन के अनुसार जब नेतृत्व की बात आती है तो समाज को नहीं लगता कि वे नैसर्गिक नेता हो सकती हैं.
नार्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं के एक दल के अध्ययन में पाया कि आज भी नेतृत्व को सांस्कृतिक तौर पर पुरुषवादी माना जाता है और महिलाओं द्वारा यह भूमिका निभाया जाना समाज को पसंद नहीं है.
लाइव साइंस में प्रकाशित खबर के अनुसार सफल नेतृत्व के लिए पुरुषवादी गुणों को अनिवार्य माना जाता है. नेतृत्व के बारे में पारंपरिक सोच में पुरुष महिलाओं की तुलना में ज्यादा उपयुक्त बैठते हैं, इसलिए नेतृत्व भूमिकाओं तक उनकी पहुंच ज्यादा होती है और उन्हें सफल बनने के लिए कम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
अध्ययन दल की जर्नल ऑफ साइकोलोजिकल बुलेटिन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के लिए यह अच्छी बात है कि महिलाओं के नेतृत्व के बारे में लोगों का रवैया बदल रहा है.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


0 comments:
Post a Comment