Friday, 22 July 2011

ताकि जंजाल न बने जीवनसाथी का रूठना...

भला कौन ऐसा शख्‍स होगा, जो अपने लाइफ पार्टनर को हमेशा खुश न देखना चाहता हो? खुशियों के आदान-प्रदान के क्रम में कई बार कुछ गिले-शिकवे भी आ जाना स्‍वाभाविक है.
ऐसे में बहुत जरूरी है कि अपने जीवनसाथी की नाराजगी को दूर करने की पूरी कोशिश की जाए. हां, इतना जरूरी ध्‍यान रखना चाहिए कि कोई भी निर्णय विवेक के साथ किया जाए.
रूठने-मनाने का सिलसिला दांपत्‍य जीवन में कड़वाहट न बनकर मिठास साबित हो, इसके लिए कुछ टिप्‍स यहां दिए जा रहे हैं:
-सबसे पहले यह पता करने का प्रयास करें कि आपके जीवनसाथी की नाराजगी की वजह क्‍या है. यह मालूम करने के बाद उस वजह को दूर करने की ईमानदार कोशिश करें.
-अगर आपके किसी व्‍यवहार से ठेस पहुंची हो, तो अहं छोड़कर मनाने में ज्‍यादा देर न करें. याद रखें कि मनाने की पहल करना आपके पार्टनर के दिल को भरपूर सुकून पहुंचाएगा और आपसी प्रेम में और इजाफा ही होगा.
-रूठे हुए लाइफ पार्टनर को मनाने की पहल में देरी आपके रूखे व हठी व्‍यवहार को जाहिर करेगी, जो आगे चलकर रिश्‍ते में कड़वाहट घोलने का काम करेगा.
-अगर रूठने का सिलसिला हर दूसरे-तीसरे दिन शुरू हो जाए, तो इस बारे में अपने साथी को खुले दिमाग से समझाएं. हर मांगें मान लेने की आदत से भी कोई बड़ी समस्‍या खड़ी हो सकती है. 
-बेहतर तरीका तो यह है कि परिवार में कोई अहम निर्णय लेने से पहले न केवल अपने जीवनसाथ को पहले से जानकारी दे दें, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्‍हें भी भागीदार बनाएं. इससे जवाबदेही का बोध पैदा होता है, निर्णय लेने की क्षमता में भी पैनापन आता है. इसका एक फायदा यह भी है कि परिणाम चाहे जैसा भी हो, आत्‍मसंतुष्टि जरूर मिलती है.
तो अब देर किस बात की. हो जाइए तैयार रिश्‍ते में और भी ज्‍यादा मिठास घोलने के लिए...

करना हो निवेश, तो मोहतरमा की राय लीजिए जनाब...

वेतनभोगी महिलाएं अपने पुरुष सहयोगियों की तुलना में कम कर अदा करती हैं. इसकी वजह यह है कि महिलाओं के लिए कर भुगतान का स्लैब जहां पुरुषों की तुलना में ऊंचा है, वहीं वे निवेश करने के मामले में पुरुषों से आगे हैं.
ऑनलाइन आयकर रिटर्न पोर्टल टैक्स स्पैनर की ‘भारत कर अनुपात 2011’ रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख भारतीय शहरों में वेतनभोगी महिलाओं का औसत कर अनुपात 4 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों के मामले में यह 6 प्रतिशत है. कर अनुपात का मतलब है आमदनी के हिसाब से कर का हिस्सा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि 76 प्रतिशत महिलाओं का कर अनुपात 5 प्रतिशत से कम है, जबकि वेतनभोगी पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 59 फीसद का है. यहां कर अनुपात से तात्पर्य वेतन का वह भाग है, जो कर के रूप में अदा किया जाता है.
अध्ययन में दिल्ली एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, बेंगलूर और हैदराबाद की करीब 500 कंपनियों के कर्मचारियों को शामिल किया गया है. महिलाओं के कम कर अदा करने की वजह यह है कि उनके लिए आयकर छूट की सीमा कहीं ऊंची 1.90 लाख रुपये है.
इसके अलावा अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि महिलाएं आवास किराया भत्ते का दावा करने तथा स्वास्थ्य खर्च के तहत कटौती लेने के मामले में पुरुषों से बेहतर हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख मेट्रो शहरों में चेन्नई और दिल्ली एनसीआर का औसत कर अनुपात सबसे कम 5 प्रतिशत है. मुंबई और हैदराबाद में यह 6 प्रतिशत और बेंगलूर में 7 फीसद है.
दिलचस्प यह है कि मुंबई में वेतनभोगियों की आमदनी चेन्नई और दिल्ली एनसीआर के लोगों की तुलना में औसतन 40 प्रतिशत अधिक है. अध्ययन में कहा गया है कि 5 लाख रुपये सालाना तक कमाने वाले वेतनभोगियों में मकान मालिकों का औसत कर अनुपात 2 प्रतिशत है, जबकि जिनके पास मकान नहीं है उनके लिए यह 5 प्रतिशत बैठता है.
ऐसे लोग जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये तक है, उनमें मकान मालिकों के लिए औसत कर अनुपात 12 प्रतिशत और गैर मकान मालिकों के लिए यह 15 प्रतिशत है. टैक्स स्पैनर का कहना है कि कर्मचारी आवास ऋण के तहत मिलने वाली छूट का फायदा उठाकर कर बचा सकते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे लोग जिनकी आमदनी 5 लाख रुपये सालाना से कम है, उनमें सिर्फ 6.8 प्रतिशत लोगों के पास अपना घर है. इससे यह पता चलता है कि बहुत कम लोग मकान खरीदने को बेहतर निवेश विकल्प मानते हैं.

Wednesday, 20 July 2011

देखें स्त्रियों को भाते हैं कैसे मर्द...|

आचार्य वात्‍स्‍यायन द्वारा रचित ग्रंथ 'कामसूत्र' में इस बात की विस्‍तार से चर्चा की गई है कि स्त्रियों को रिझाने में किस तरह के पुरुष ज्‍यादा कामयाब होते हैं. भले ही प्राचीन काल में लिखे गए 'सूत्र' अब उतने कारगर हों या नहीं, लेकिन इसे जानने की उत्‍सुकता तो आखिर बनी ही रहती है...

नेतागिरी में पुरुषों से कमतर समझी जाती हैं महिलाएं

महिलाओं ने भले ही जीवन के हर क्षेत्र में काफी प्रगति कर ली हो, लेकिन एक अध्ययन के अनुसार जब नेतृत्व की बात आती है तो समाज को नहीं लगता कि वे नैसर्गिक नेता हो सकती हैं.
नार्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं के एक दल के अध्ययन में पाया कि आज भी नेतृत्व को सांस्कृतिक तौर पर पुरुषवादी माना जाता है और महिलाओं द्वारा यह भूमिका निभाया जाना समाज को पसंद नहीं है.
लाइव साइंस में प्रकाशित खबर के अनुसार सफल नेतृत्व के लिए पुरुषवादी गुणों को अनिवार्य माना जाता है. नेतृत्व के बारे में पारंपरिक सोच में पुरुष महिलाओं की तुलना में ज्यादा उपयुक्त बैठते हैं, इसलिए नेतृत्व भूमिकाओं तक उनकी पहुंच ज्यादा होती है और उन्हें सफल बनने के लिए कम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
अध्ययन दल की जर्नल ऑफ साइकोलोजिकल बुलेटिन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के लिए यह अच्छी बात है कि महिलाओं के नेतृत्व के बारे में लोगों का रवैया बदल रहा है.

Tuesday, 19 July 2011

समलैंगिक पुरुषों का 'भेद' खोल सकती हैं महिलाएं

बहुत लोग इस बात पर यकीन नहीं करेंगे, लेकिन एक नए शोध में दावा किया गया है कि महिलाओं में ऐसी जन्मजात क्षमता होती है कि वे किसी पुरुष का चेहरा देखकर बता सकती हैं कि वह सामान्य है या समलैंगिक.
टोरंटो यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि महिलाएं जब सही मायने में प्यार के मूड में होती हैं, तो वे बता सकती हैं कि कोई पुरुष समलैंगिक है या नहीं.
अपने शोध में शोधकर्ताओं ने महिलाओं के एक समूह को 80 पुरुषों के फोटो दिखाए और सभी के चेहरे पर एकसमान भाव थे. इन महिलाओं को इन पुरुषों के बारे में कोई किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी गयी, लेकिन इन महिलाओं ने एकदम सटीक तरीके से बताया कि कौन सा पुरुष समलैंगिक है और कौन सा सामान्य.
शोध में बताया गया है कि जब महिलाएं रोमांस के मूड में होती हैं या मासिक चक्र के एक विशेष चरण में होती हैं, तो इस संबंध में वे एकदम सही अंदाजा लगाती हैं.
डेली एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका कारण महिलाओं की वह सदियों पुरानी पूर्वाभास क्षमता और जैविकीय जरूरत है, जिसके तहत वे बच्चे पैदा करने के लिए अपने साथी का चुनाव करती हैं.

अब एक और भाषा में 'कामसूत्र' का अनुवाद...

यौन कला और उसके अन्य पहलुओं को समेटती मशहूर विषयवस्तु ‘कामसूत्र’ का रूस में बोली जाने वाली उदमुर्त भाषा में अनुवाद किया गया है. उदमुर्त भाषा में अनुवाद कवि-लेखक पिओत्र जाखारोव की ओर से किया गया है. उनके मुताबिक यह अनुवाद उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि उदमुर्त भाषा में यौन से जुड़ी शब्दावली विस्तृत नहीं है.
इस अनुवाद को प्रकाशित करने वाले प्रकाशन समूह की निदेशक लारिसा ओरेखोवा ने कहा, ‘‘उदमुर्त भाषा में कामसूत्र का यह पहला प्रकाशन होगा, क्योंकि और किसी में इतना उत्साह नहीं होगा कि वह इसका अनुवाद करे.’’
उदमुर्त भाषा रूस के उदमुर्तिया गणराज्य में बोली जाती है. इस भाषा को बोलने वालों की संख्या लगभग पांच लाख है.

50 से शुरू होती है महिलाओं की बेहतरीन जिंदगी...

आपको यह सुनकर शायद आश्चर्य हो लेकिन महिलाओं की बेहतरीन जिंदगी पचास की उम्र से शुरु होती है. एक सर्वेक्षण से पता चला है कि महिलाओं की जिंदगी के बेहतरीन साल पचास की उम्र के बाद शुरु होते हैं और 92 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि वह इससे पहले इतनी खुश कभी नहीं रहीं.
सर्वेक्षण में पता चला कि पांच में से चार महिलाओं को लगता है कि वह उतना सेक्सी महसूस करती है जितना 20 के दशक में करतीं थीं. विवाहित या अन्य पुरूष के साथ रह रही 86 प्रतिशत महिलाओं का कहना है कि ‘उनका यौन जीवन 20 के दशक से कहीं बेहतर है.’
डेली एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक युअर्स पत्रिका ने करीब 2000 प्रौढ़ महिलाओं पर यह सर्वेक्षण किया. सर्वेक्षण में पाया गया कि 50 के पार की चार में तकरीबन तीन महिलाओं को लगता है ‘परेशान अभिभावक बनने से ज्यादा मजा कहीं भी जाने के लिए आजाद दादी-नानी बनने में है.’
हालांकि उनमें से कुछ जरूर ‘बूढी दिखने को लेकर’ चिंतित थीं जबकि 70 प्रतिशत ने कहा कि यदि उन्हें कॉस्मेटिक चिकित्सा का प्रस्ताव मिला तो वे इसे ठुकरा देंगी.